
भगवतीस्त्रोतम् – जय भगवति देवि नमो वरदे
भगवतीस्त्रोतम् – जय भगवति देवि नमो वरदे भगवती की स्तुति में रचित भक्तिपूर्ण स्तोत्र है। इसमें देवी के विभिन्न स्वरूपों, शक्ति, दुःख-निवारण, समृद्धि और सिद्धि की प्रार्थना की गई है।
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भगवतीस्त्रोतम् – जय भगवति देवि नमो वरदे भगवती की स्तुति में रचित भक्तिपूर्ण स्तोत्र है। इसमें देवी के विभिन्न स्वरूपों, शक्ति, दुःख-निवारण, समृद्धि और सिद्धि की प्रार्थना की गई है।
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जय जय भैरव असुर भयाउनि एक प्रसिद्ध भैरव स्तुति है, जिसमें भगवान भैरव की महिमा, स्वरूप और भक्तवत्सलता का वर्णन किया गया है। इस स्तुति का पाठ भक्ति एवं श्रद्धा के साथ किया जाता है।
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रामरक्षास्तोत्रम् विनियोगः अस्य श्रीरामरक्षास्तोत्रमन्त्रस्य बुधकौशिक ऋषिः । श्रीसीतारामचन्द्रो देवता । अनुष्टुप् छन्दः । सीता शक्तिः । श्रीमद् हनुमान् कीलकम् । श्रीरामचन्द्रप्रीत्यर्थे रामरक्षास्तोत्रजपे विनियोगः । ध्यानम् ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनु
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सङ्कटास्तुतिः सदावृन्दारकोवृन्दा-ऽऽनन्द-सन्दोह-दायकम् । अमन्दमङ्गलागारं वन्दे शङ्करनन्दनम् ॥१॥ किं कार्यं कठिनं कुतः परिभवः कुत्रापवादाद् भयं किं मित्रं न हि किन्नु राजसदनं गम्यं न विद्या च का । किं वाऽन्याज्जगतीतले प्रवद यत्तेषामसम्भावितं येषां हृतक
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गोस्वामी तुलसीदास कृत हनुमान चालीसा का पाठ, आरंभिक दोहा और सरल भावार्थ।
पढ़ें →आदि शंकराचार्य से संबद्ध प्रसिद्ध शिव पंचाक्षर स्तोत्र का परिचय।
पढ़ें →गणपति अथर्वशीर्ष के पाठ और उसके दार्शनिक संकेतों का अध्ययन।
पढ़ें →विद्यारम्भ और अध्ययन के अवसर पर प्रचलित सरस्वती वंदना का परिचय।
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