जय जय भैरव असुर भयाउनि, पशुपति भामिन माया ।
सहज सुमति वर दिय हे गोसाउनि, अनुगति गति तुऽऽपाया ।।
जय जय भैरव असुर भयाउनि..........।1।।
वासर रैन सवासन शोभित, चरण चन्द मणिचूडा ।
कतहुँ कऽ दैत्य मारिमुँह मेलल, कतहु उगलि केर कुड़ा ।।
जय जय भैरव असुर भयाउनि.........।।12।।
सावर वरण नयन अनुरंजीत, जलधि जोग फुल कोका ।
कट कट विकट ओठ फुट फांंररि, लिधुरि फेन उठि फोंका ।।
जय जय भैरव असुर भयाउनि...
घन घन घनन घुँघड़ कत बाजैऽऽ, हन हन करि तुअ ताता ।
विद्यापति कवि तु पद सेवक, पुत्र विशरि जनि माता ।।
जय जय भैरव असुर भयाउनि.........।।14।।
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