मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
भावार्थ
हम त्रिनेत्रधारी भगवान शिव की उपासना करते हैं, जो जीवन को पोषण देने वाले हैं। साधक इस मंत्र का पाठ श्रद्धा और एकाग्रता के साथ करता है।
पाठ के समय ध्यान रखने योग्य बातें
- उच्चारण को स्पष्ट रखें।
- मंत्र के अर्थ और भाव को समझकर पाठ करें।
- विशेष अनुष्ठान के लिए योग्य आचार्य से विधि पूछना उचित है।