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शुभ मुहूर्त 2026-27 का धार्मिक कवर चित्र, जिसमें विवाह, जनेऊ संस्कार, मुण्डन और गृहप्रवेश की झलक हो
▦ पंचांग

शुभ मुहूर्त 2026-27 | विवाह, उपनयन, मुण्डन और गृहप्रवेश

अक्टूबर 2026 से जुलाई 2027 तक के उपनयन, विवाह, द्विरागमन, मुण्डन, गृहारम्भ और गृहप्रवेश के शुभ दिनांक जानें। मिथिला क्षेत्र की सौराठ सभा की मुहूर्त-सूची पर आधारित तिथियों के साथ प्रत्येक संस्कार का सरल अर्थ और सामान्य प्रश्नों के उत्तर पढ़ें। मुहूर्त स्थान और पंचांग के अनुसार बदल सकते हैं।

श्रवण झा 25 अक्टूबर 2026⏱ 6 मिनट पढ़ें👁 3

भारतीय परम्परा में विवाह, उपनयन या गृहप्रवेश जैसे बड़े कार्य शुभ समय देखकर किए जाते हैं। इस समय को मुहूर्त कहते हैं। इस पेज पर अक्टूबर 2026 से जुलाई 2027 तक के शुभ दिन संस्कार के अनुसार अलग-अलग तालिकाओं में दिए गए हैं। हर संस्कार का सरल अर्थ भी लिखा है, ताकि पहली बार पढ़ने वाला भी बात समझ ले।

ज़रूरी बात: ये तिथियाँ एक छपे हुए पंचांग की सूची पर आधारित हैं। मुहूर्त स्थान, कुल-परम्परा और पंचांग के अनुसार भिन्न हो सकता है। कोई भी संस्कार तय करने से पहले अपने कुल-पुरोहित या स्थानीय विद्वान पण्डित जी से तिथि की पुष्टि ज़रूर करा लें।

इस पेज की तिथियाँ मिथिला क्षेत्र की “सौराठ सभा” (वैवाहिक सभा) की मुहूर्त-सूची पर आधारित हैं, जिसकी अवधि जुलाई 2026 से 9 जुलाई 2027 तक बताई गई है। इसलिए ये मिथिला और पूर्वी भारत के पंचांग-परम्परा के अनुसार हैं। अन्य क्षेत्रों के पंचांग में दिन का अन्तर हो सकता है।

मुहूर्त क्या होता है?

पंचांग में तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण, ये पाँच अंग होते हैं। परम्परा में इनकी स्थिति देखकर किसी कार्य के लिए अनुकूल दिन चुना जाता है। जिस दिन ये अंग किसी संस्कार के लिए उचित माने जाते हैं, उसे उस संस्कार का शुभ दिन कहा जाता है। यह मान्यता श्रद्धा और शास्त्र-परम्परा पर आधारित है।

तालिका को कैसे पढ़ें

हर तालिका में बायीं ओर माह है और दायीं ओर उस माह के शुभ दिनांक। अक्टूबर से दिसम्बर की तिथियाँ वर्ष 2026 की हैं, और जनवरी से जुलाई की तिथियाँ वर्ष 2027 की। उपनयन की तालिका में कुछ तिथियों के साथ कोष्ठक में टिप्पणी है। “छन्दोग” का अर्थ है कि वह दिन छान्दोग्य (सामवेद) शाखा वालों के लिए है, और “क्षत्रिय-वैश्य” का अर्थ है कि वह दिन क्षत्रिय और वैश्य वर्ग के लिए है।

उपनयन संस्कार

उपनयन का अर्थ है “गुरु के समीप ले जाना”। इसमें बालक को यज्ञोपवीत (जनेऊ) धारण कराया जाता है और गायत्री मन्त्र की दीक्षा दी जाती है। परम्परा में इसे विद्या-आरम्भ और जीवन के नए चरण का द्वार माना गया है।

माहशुभ दिनांक
फरवरी 20279 (छन्दोग), 11, 16 (छन्दोग), 17
मार्च 202717 (क्षत्रिय-वैश्य), 18
अप्रैल 202711
मई 202710
जून 20277, 9, 13, 14
जुलाई 20276 (छन्दोग), 8

विवाह संस्कार

विवाह सोलह संस्कारों में प्रमुख है। इसमें अग्नि को साक्षी मानकर वर और वधू जीवन भर साथ निभाने का संकल्प लेते हैं। परम्परा में देवोत्थान एकादशी के बाद से विवाह के मुहूर्त आरम्भ माने जाते हैं।

माहशुभ दिनांक
नवम्बर 202622, 25, 26, 30
दिसम्बर 20264, 6, 9, 10, 11, 14
जनवरी 202718, 24, 28, 29, 31
फरवरी 20277, 10, 11, 15, 21, 22, 24, 25, 28
मार्च 20271, 3, 4, 10, 11
अप्रैल 202716, 21, 23, 25, 28, 29
मई 20272, 3, 7, 9, 13, 17, 20, 21, 23, 24, 26, 27, 30, 31
जून 20272, 4, 9, 10, 13, 14, 18, 23, 24
जुलाई 20271, 2, 7, 8, 9

द्विरागमन

विवाह के बाद वधू के दूसरी बार ससुराल जाने की रीति को द्विरागमन कहते हैं। कई क्षेत्रों में इसे गौना भी कहा जाता है।

माहशुभ दिनांक
नवम्बर 202622, 25, 26, 29
दिसम्बर 20269, 10, 11, 13, 14
फरवरी 202715, 17, 18, 19, 22, 24, 25
मार्च 202710, 11
अप्रैल 202718, 19, 21, 23, 25, 26
मई 20279, 10, 12

मुण्डन (चूड़ाकर्म) संस्कार

इसमें बच्चे के पहली बार केश उतारे जाते हैं। इसे शुद्धि और स्वस्थ विकास की कामना से जोड़ा जाता है। यह प्रायः कुल-परम्परा के अनुसार बच्चे के प्रथम या तृतीय वर्ष में किया जाता है।

माहशुभ दिनांक
नवम्बर 202626
दिसम्बर 202614
जनवरी 202720, 27
फरवरी 20278, 11, 18, 19, 22, 25
मार्च 202710, 11
मई 202712, 17, 21
जून 20277, 14, 21, 23, 24
जुलाई 20275, 12

गृहारम्भ

गृहारम्भ का अर्थ है नए घर की नींव रखना या निर्माण शुरू करना। इसके लिए शुभ दिन चुनकर भूमि-पूजन करने की परम्परा है।

माहशुभ दिनांक
अक्टूबर 202624, 26, 30
नवम्बर 202620, 21, 26, 28
जनवरी 202722
फरवरी 202719, 22, 25
अप्रैल 202723
मई 202717, 20, 22
जून 202714, 21, 23, 24

गृहप्रवेश

गृहप्रवेश यानी नए घर में पहली बार रहने के लिए प्रवेश। इसमें पूजा, हवन और कलश-स्थापना करके परिवार घर में प्रवेश करता है।

माहशुभ दिनांक
अक्टूबर 202624
नवम्बर 202614, 19, 20, 21
दिसम्बर 202614
जनवरी 202718, 20
फरवरी 202715, 17, 18, 19
मई 202710, 12, 17
जून 202714
जुलाई 20279, 10

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हर माह विवाह के मुहूर्त क्यों नहीं मिलते?

परम्परा में कुछ अवधियों में माँगलिक कार्य नहीं किए जाते, जैसे चातुर्मास (हरिशयनी एकादशी से देवोत्थान एकादशी तक)। इसीलिए पंचांग में विवाह की तिथियाँ चुने हुए दिनों में ही दी जाती हैं और कुछ महीनों में बहुत कम मिलती हैं।

अगर किसी दूसरे पंचांग में तिथि अलग दिखे तो क्या करें?

अलग-अलग पंचांग गणना की पद्धति और स्थान के अनुसार एक दिन का अन्तर बता सकते हैं। ऐसे में अपने कुल-पुरोहित या अपने क्षेत्र में माने जाने वाले पंचांग की सलाह को प्राथमिकता दें।

क्या उपनयन की तिथि सबके लिए एक ही होती है?

नहीं। पंचांग में कुछ तिथियाँ वेद-शाखा या वर्ण के अनुसार अलग बताई जाती हैं। इसलिए अपनी शाखा और परम्परा के अनुसार ही तिथि चुनें।

क्या एक ही दिन कई संस्कार हो सकते हैं?

तालिकाओं में कुछ दिनांक एक से अधिक संस्कारों में आते हैं, जैसे 14 जून या 10 मार्च। पर एक ही दिन में कितने संस्कार करने हैं, यह परिवार की परम्परा और पुरोहित की सलाह पर निर्भर है।

पाठ-आधार: सौराठ सभा की मुहूर्त-सूची, संवत् 2083 [विश्वविद्यालय]

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श्रवण झा

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