भारतीय परम्परा में हर माह कोई न कोई पर्व, व्रत या जयन्ती आती है। इस पेज पर नवम्बर 2026 से जुलाई 2027 तक के प्रमुख पर्वों की तिथियाँ एक जगह दी गई हैं। हर पर्व के सामने एक सरल पंक्ति में लिखा है कि वह क्यों मनाया जाता है, ताकि जिन्हें पर्व की पृष्ठभूमि नहीं पता, वे भी आसानी से समझ सकें।
यहाँ दी गई तिथियाँ एक छपे हुए पंचांग की “विशिष्ट पर्व सूची” पर आधारित हैं। उसी पंचांग के अनुसार संवत् 2083 चल रहा है।
इस सूची को कैसे पढ़ें
हर तालिका में तीन खाने हैं: तिथि (अंग्रेज़ी कैलेण्डर की तारीख), पर्व का नाम और सरल अर्थ। जहाँ एक ही दिन कई पर्व हैं, वहाँ उन्हें एक साथ लिखा गया है। जैसे 8 नवम्बर को दीपावली, लक्ष्मी पूजन और काली पूजा एक ही दिन पड़ते हैं।
अक्टूबर–नवम्बर 2026 : दीपावली से कार्तिक पूर्णिमा तक
| तिथि | पर्व | सरल अर्थ |
|---|---|---|
| 31 अक्टूबर | सरदार पटेल जयन्ती | भारत के पहले उपप्रधानमन्त्री सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्मदिन। रियासतों को जोड़ने में उनकी भूमिका के लिए याद किए जाते हैं। |
| 6 नवम्बर | धन्वन्तरि जयन्ती (धनतेरस) | आयुर्वेद के देवता भगवान धन्वन्तरि का पर्व। इसी दिन से दीपावली के पाँच दिन शुरू होते हैं। |
| 7 नवम्बर | हनुमान जयन्ती | पंचांग में इस तिथि पर हनुमान जयन्ती दी गई है। कुछ परम्पराओं में दीपावली से एक दिन पहले हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। |
| 8 नवम्बर | दीपावली, लक्ष्मी पूजा, काली पूजा | दीपों का पर्व। सन्ध्या को माँ लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा होती है। बंगाल और मिथिला में इसी रात माँ काली की पूजा की परम्परा है। |
| 9 नवम्बर | सोमवती अमावस्या, अन्नकूट, गोवर्धन पूजा, गोपूजा | सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या सोमवती कहलाती है। गोवर्धन पूजा में भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा याद की जाती है और अन्नकूट में अनेक व्यंजनों का भोग लगता है। गौ-सेवा का भी दिन है। कुछ स्थानों पर ये पूजाएँ एक दिन बाद भी होती हैं, इसलिए स्थानीय पंचांग देख लें। |
| 10 नवम्बर | कालिदास जयन्ती | महाकवि कालिदास की स्मृति का दिन। “अभिज्ञानशाकुन्तलम्” और “मेघदूतम्” जैसी रचनाओं के कारण उन्हें संस्कृत साहित्य का शिखर माना जाता है। |
| 11 नवम्बर | भाईदूज (भ्रातृद्वितीया), चित्रगुप्त पूजा | बहन भाई के सुख और लम्बी आयु की कामना करती है। इसी दिन कलम-दवात की पूजा भी होती है, जो लिखने-पढ़ने वालों के लिए विशेष मानी जाती है। |
| 15 नवम्बर | प्रतिहार षष्ठी व्रत (सूर्यषष्ठी / छठ) | सूर्य देव की उपासना का व्रत। इसमें उगते और डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। यह बिहार, झारखण्ड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में विशेष रूप से मनाया जाता है। |
| 17 नवम्बर | गोपाष्टमी | गौ-माता और गोपालकों के सम्मान का दिन। मान्यता है कि इसी दिन से श्रीकृष्ण ने गाय चराना शुरू किया था। |
| 18 नवम्बर | अक्षय नवमी | इस दिन आँवले के वृक्ष की पूजा और उसके नीचे भोजन करने की परम्परा है। |
| 20 नवम्बर | देवोत्थान एकादशी | मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु चार माह की योगनिद्रा से जागते हैं। इसके बाद विवाह जैसे शुभ कार्य आरम्भ होते हैं। |
| 21 नवम्बर | तुलसी विवाह | तुलसी माता और भगवान शालिग्राम के प्रतीकात्मक विवाह का उत्सव। |
| 22 नवम्बर | विद्यापति पर्व | मिथिला के महान कवि विद्यापति की स्मृति में मनाया जाने वाला पर्व। |
| 24 नवम्बर | कार्तिक पूर्णिमा, हरिहर क्षेत्र स्नान, सोनपुर मेला | कार्तिक मास की पूर्णिमा। इस दिन नदी-स्नान और दीपदान की परम्परा है। बिहार के सोनपुर में हरिहर क्षेत्र का प्रसिद्ध मेला भी इसी समय लगता है। |
दिसम्बर 2026
| तिथि | पर्व | सरल अर्थ |
|---|---|---|
| 1 दिसम्बर | कालभैरवाष्टमी | भगवान शिव के भैरव स्वरूप की उपासना का दिन। |
| 14 दिसम्बर | विवाह पंचमी | श्रीराम और माता सीता के विवाह की स्मृति का पर्व। मिथिला और अयोध्या में इसे विशेष उत्साह से मनाया जाता है। |
| 20 दिसम्बर | गीता जयन्ती | जिस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया, उसकी स्मृति में मनाई जाती है। |
जनवरी–मार्च 2027
| तिथि | पर्व | सरल अर्थ |
|---|---|---|
| 14 जनवरी | मकर संक्रान्ति | सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का दिन। इस दिन स्नान, दान और तिल-गुड़ का प्रसाद परम्परा से जुड़ा है। |
| 26 जनवरी | गणतन्त्र दिवस | भारत का संविधान लागू होने की स्मृति में मनाया जाने वाला राष्ट्रीय पर्व। |
| 6 फरवरी | मौनी अमावस्या | माघ मास की अमावस्या। मौन रहकर स्नान, जप और दान की परम्परा है। |
| 7 फरवरी | शिशिर नवरात्र आरम्भ | माघ मास में पड़ने वाले नवरात्र का पहला दिन। इसे गुप्त नवरात्र भी कहते हैं। |
| 11 फरवरी | सरस्वती पूजा (वसन्त पंचमी) | विद्या, संगीत और ज्ञान की देवी माँ सरस्वती की पूजा का दिन। वसन्त ऋतु के स्वागत का भी पर्व है। |
| 13 फरवरी | अचला सप्तमी | सूर्य उपासना का दिन। माघ शुक्ल सप्तमी को रथ सप्तमी भी कहा जाता है। |
| 20 फरवरी | माघी पूर्णिमा, रविदास जयन्ती | माघ मास की पूर्णिमा, जिस दिन तीर्थ-स्नान का विशेष महत्त्व माना गया है। इसी तिथि पर सन्त रविदास जी की जयन्ती भी मनाई जाती है। |
| 6 मार्च | महाशिवरात्रि | भगवान शिव की आराधना की महान रात्रि। भक्त उपवास, अभिषेक और रात्रि-जागरण करते हैं। |
| 8 मार्च | सोमवती अमावस्या | सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या। स्नान, दान और पितरों के स्मरण की परम्परा है। |
| 21 मार्च | होलिका दहन | बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक। भक्त प्रह्लाद की कथा से जुड़ा पर्व। |
| 22 मार्च | होली | रंगों का पर्व, जो आपसी प्रेम और मेल-मिलाप का सन्देश देता है। |
अप्रैल–मई 2027
| तिथि | पर्व | सरल अर्थ |
|---|---|---|
| 7 अप्रैल | वसन्त नवरात्र आरम्भ, नववर्षारम्भ | चैत्र शुक्ल प्रतिपदा। हिन्दू नववर्ष और चैत्र नवरात्र का पहला दिन। |
| 12 अप्रैल | सूर्यषष्ठी व्रत (चैती छठ) | चैत्र मास में किया जाने वाला सूर्य उपासना का व्रत। |
| 14 अप्रैल | मेष संक्रान्ति | सूर्य के मेष राशि में प्रवेश का दिन। कई क्षेत्रों में यह नववर्ष और फसल के पर्वों से जुड़ा है। |
| 15 अप्रैल | रामनवमी | भगवान श्रीराम के जन्म का उत्सव। |
| 18 अप्रैल | महावीर जयन्ती | जैन परम्परा के चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर के जन्म का पर्व। |
| 23 अप्रैल | वीर कुँवरसिंह जयन्ती | 1857 के स्वतन्त्रता संग्राम के वीर योद्धा बाबू वीर कुँवरसिंह की स्मृति का दिन। |
| 1 मई | श्रमिक दिवस | मेहनतकश लोगों के सम्मान का अन्तरराष्ट्रीय दिवस। |
| 9 मई | अक्षय तृतीया, परशुराम जयन्ती | मान्यता है कि इस दिन किया गया शुभ कार्य कभी क्षीण नहीं होता। इसी दिन भगवान परशुराम का जन्मोत्सव भी है। |
| 11 मई | शंकराचार्य जयन्ती | अद्वैत वेदान्त के प्रवर्तक आदि शंकराचार्य की जयन्ती। |
| 18 मई | नृसिंह चतुर्दशी | भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार का पर्व, जो भक्त प्रह्लाद की रक्षा की कथा से जुड़ा है। |
| 20 मई | वैशाख पूर्णिमा, कूर्म जयन्ती, बुद्ध जयन्ती | वैशाख मास की पूर्णिमा। इसी तिथि पर भगवान विष्णु के कूर्म अवतार की जयन्ती और गौतम बुद्ध का जन्मोत्सव मनाया जाता है। |
जून–जुलाई 2027
| तिथि | पर्व | सरल अर्थ |
|---|---|---|
| 4 जून | वट सावित्री व्रत | सावित्री और सत्यवान की कथा से जुड़ा व्रत। इसमें वट वृक्ष की पूजा की जाती है। |
| 7 जून | महाराणा प्रताप जयन्ती | मेवाड़ के वीर शासक महाराणा प्रताप की स्मृति का दिन। |
| 10 जून | विन्ध्यवासिनी पूजा | माँ विन्ध्यवासिनी की उपासना का दिन। |
| 13 जून | गंगा दशहरा | माँ गंगा के पृथ्वी पर अवतरण की स्मृति में मनाया जाता है। गंगा-स्नान और दान की परम्परा है। |
| 18 जून | कबीर जयन्ती | सन्त कबीर की स्मृति का दिन, जिनके दोहे आज भी जीवन के सरल सत्य सिखाते हैं। |
| 4 जुलाई | ग्रीष्म नवरात्र आरम्भ | आषाढ़ मास में पड़ने वाले गुप्त नवरात्र की शुरुआत। |
| 5 जुलाई | जगन्नाथ रथयात्रा | पुरी में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी की भव्य रथयात्रा। |
| 14 जुलाई | हरिशयनी एकादशी, चातुर्मास्य व्रतारम्भ | मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में जाते हैं। इसी से चार माह के चातुर्मास्य व्रत का आरम्भ होता है। |
| 18 जुलाई | गुरुपूर्णिमा | गुरु के प्रति आभार और श्रद्धा प्रकट करने का दिन। इसे महर्षि वेदव्यास की स्मृति से भी जोड़ा जाता है। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पर्व की तिथि हर साल बदल क्यों जाती है?
अधिकांश हिन्दू पर्व चन्द्रमा की तिथियों के अनुसार तय होते हैं, जबकि अंग्रेज़ी कैलेण्डर सूर्य के वर्ष पर चलता है। इसीलिए एक ही पर्व अंग्रेज़ी कैलेण्डर में हर साल अलग तारीख पर आता है। मकर संक्रान्ति जैसे सूर्य-आधारित पर्वों की तारीख लगभग स्थिर रहती है।
एक पर्व की तिथि दो पंचांगों में अलग क्यों दिखती है?
तिथि सूर्योदय के समय देखी जाती है, और कई बार वह दो दिन में फैली होती है। अलग-अलग पंचांग गणना की पद्धति और स्थान के अनुसार थोड़ा अलग दिन बता सकते हैं। ऐसे में अपने क्षेत्र का पंचांग या स्थानीय विद्वान की सलाह लेना सबसे अच्छा है।
सोमवती अमावस्या किसे कहते हैं?
जब अमावस्या तिथि सोमवार के दिन पड़ती है, तो उसे सोमवती अमावस्या कहते हैं। परम्परा में इस दिन स्नान, दान और पितरों के स्मरण को महत्त्व दिया गया है।
चातुर्मास में शुभ कार्य क्यों रुकते हैं?
परम्परा के अनुसार हरिशयनी एकादशी से देवोत्थान एकादशी तक भगवान विष्णु विश्राम में माने जाते हैं। इन चार महीनों में विवाह जैसे माँगलिक कार्य सामान्यतः नहीं किए जाते। यह मान्यता श्रद्धा और परम्परा पर आधारित है, इसका पालन कुल-परम्परा के अनुसार करें।
पाठ-आधार: [विश्वविद्यालय पंचाग, संवत् 2083, “विशिष्ट पर्व सूची”]
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