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नवम्बर 2026 से जुलाई 2027 तक के प्रमुख हिन्दू पर्वों और व्रतों का धार्मिक कवर चित्र
▦ पंचांग

हिन्दू पर्व एवं व्रत 2026–2027 | प्रमुख त्योहारों की तिथियाँ

नवम्बर 2026 से जुलाई 2027 तक के प्रमुख हिन्दू पर्वों, व्रतों और त्योहारों की तिथियाँ जानें। दीपावली, कार्तिक पूर्णिमा, सरस्वती पूजा, महाशिवरात्रि, होली, रामनवमी और गुरुपूर्णिमा सहित प्रत्येक पर्व का सरल परिचय पढ़ें। तिथियाँ स्थान के अनुसार बदल सकती हैं।

संपादकीय डेस्क 25 अक्टूबर 2026⏱ 9 मिनट पढ़ें👁 8

भारतीय परम्परा में हर माह कोई न कोई पर्व, व्रत या जयन्ती आती है। इस पेज पर नवम्बर 2026 से जुलाई 2027 तक के प्रमुख पर्वों की तिथियाँ एक जगह दी गई हैं। हर पर्व के सामने एक सरल पंक्ति में लिखा है कि वह क्यों मनाया जाता है, ताकि जिन्हें पर्व की पृष्ठभूमि नहीं पता, वे भी आसानी से समझ सकें।

यहाँ दी गई तिथियाँ एक छपे हुए पंचांग की “विशिष्ट पर्व सूची” पर आधारित हैं। उसी पंचांग के अनुसार संवत् 2083 चल रहा है।

ध्यान दें: पर्व की तिथि और पूजा का समय स्थान के अनुसार भिन्न हो सकता है। कई बार तिथि दो दिन में बँटी होती है, इसलिए अपने नगर के पंचांग या स्थानीय पण्डित जी से भी मिला लें। व्रत और पूजा की विधि कुल-परम्परा या गुरु के अनुसार करें।

इस सूची को कैसे पढ़ें

हर तालिका में तीन खाने हैं: तिथि (अंग्रेज़ी कैलेण्डर की तारीख), पर्व का नाम और सरल अर्थ। जहाँ एक ही दिन कई पर्व हैं, वहाँ उन्हें एक साथ लिखा गया है। जैसे 8 नवम्बर को दीपावली, लक्ष्मी पूजन और काली पूजा एक ही दिन पड़ते हैं।

अक्टूबर–नवम्बर 2026 : दीपावली से कार्तिक पूर्णिमा तक

तिथिपर्वसरल अर्थ
31 अक्टूबरसरदार पटेल जयन्तीभारत के पहले उपप्रधानमन्त्री सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्मदिन। रियासतों को जोड़ने में उनकी भूमिका के लिए याद किए जाते हैं।
6 नवम्बरधन्वन्तरि जयन्ती (धनतेरस)आयुर्वेद के देवता भगवान धन्वन्तरि का पर्व। इसी दिन से दीपावली के पाँच दिन शुरू होते हैं।
7 नवम्बरहनुमान जयन्तीपंचांग में इस तिथि पर हनुमान जयन्ती दी गई है। कुछ परम्पराओं में दीपावली से एक दिन पहले हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है।
8 नवम्बरदीपावली, लक्ष्मी पूजा, काली पूजादीपों का पर्व। सन्ध्या को माँ लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा होती है। बंगाल और मिथिला में इसी रात माँ काली की पूजा की परम्परा है।
9 नवम्बरसोमवती अमावस्या, अन्नकूट, गोवर्धन पूजा, गोपूजासोमवार को पड़ने वाली अमावस्या सोमवती कहलाती है। गोवर्धन पूजा में भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा याद की जाती है और अन्नकूट में अनेक व्यंजनों का भोग लगता है। गौ-सेवा का भी दिन है। कुछ स्थानों पर ये पूजाएँ एक दिन बाद भी होती हैं, इसलिए स्थानीय पंचांग देख लें।
10 नवम्बरकालिदास जयन्तीमहाकवि कालिदास की स्मृति का दिन। “अभिज्ञानशाकुन्तलम्” और “मेघदूतम्” जैसी रचनाओं के कारण उन्हें संस्कृत साहित्य का शिखर माना जाता है।
11 नवम्बरभाईदूज (भ्रातृद्वितीया), चित्रगुप्त पूजाबहन भाई के सुख और लम्बी आयु की कामना करती है। इसी दिन कलम-दवात की पूजा भी होती है, जो लिखने-पढ़ने वालों के लिए विशेष मानी जाती है।
15 नवम्बरप्रतिहार षष्ठी व्रत (सूर्यषष्ठी / छठ)सूर्य देव की उपासना का व्रत। इसमें उगते और डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। यह बिहार, झारखण्ड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में विशेष रूप से मनाया जाता है।
17 नवम्बरगोपाष्टमीगौ-माता और गोपालकों के सम्मान का दिन। मान्यता है कि इसी दिन से श्रीकृष्ण ने गाय चराना शुरू किया था।
18 नवम्बरअक्षय नवमीइस दिन आँवले के वृक्ष की पूजा और उसके नीचे भोजन करने की परम्परा है।
20 नवम्बरदेवोत्थान एकादशीमान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु चार माह की योगनिद्रा से जागते हैं। इसके बाद विवाह जैसे शुभ कार्य आरम्भ होते हैं।
21 नवम्बरतुलसी विवाहतुलसी माता और भगवान शालिग्राम के प्रतीकात्मक विवाह का उत्सव।
22 नवम्बरविद्यापति पर्वमिथिला के महान कवि विद्यापति की स्मृति में मनाया जाने वाला पर्व।
24 नवम्बरकार्तिक पूर्णिमा, हरिहर क्षेत्र स्नान, सोनपुर मेलाकार्तिक मास की पूर्णिमा। इस दिन नदी-स्नान और दीपदान की परम्परा है। बिहार के सोनपुर में हरिहर क्षेत्र का प्रसिद्ध मेला भी इसी समय लगता है।

दिसम्बर 2026

तिथिपर्वसरल अर्थ
1 दिसम्बरकालभैरवाष्टमीभगवान शिव के भैरव स्वरूप की उपासना का दिन।
14 दिसम्बरविवाह पंचमीश्रीराम और माता सीता के विवाह की स्मृति का पर्व। मिथिला और अयोध्या में इसे विशेष उत्साह से मनाया जाता है।
20 दिसम्बरगीता जयन्तीजिस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया, उसकी स्मृति में मनाई जाती है।

जनवरी–मार्च 2027

तिथिपर्वसरल अर्थ
14 जनवरीमकर संक्रान्तिसूर्य के मकर राशि में प्रवेश का दिन। इस दिन स्नान, दान और तिल-गुड़ का प्रसाद परम्परा से जुड़ा है।
26 जनवरीगणतन्त्र दिवसभारत का संविधान लागू होने की स्मृति में मनाया जाने वाला राष्ट्रीय पर्व।
6 फरवरीमौनी अमावस्यामाघ मास की अमावस्या। मौन रहकर स्नान, जप और दान की परम्परा है।
7 फरवरीशिशिर नवरात्र आरम्भमाघ मास में पड़ने वाले नवरात्र का पहला दिन। इसे गुप्त नवरात्र भी कहते हैं।
11 फरवरीसरस्वती पूजा (वसन्त पंचमी)विद्या, संगीत और ज्ञान की देवी माँ सरस्वती की पूजा का दिन। वसन्त ऋतु के स्वागत का भी पर्व है।
13 फरवरीअचला सप्तमीसूर्य उपासना का दिन। माघ शुक्ल सप्तमी को रथ सप्तमी भी कहा जाता है।
20 फरवरीमाघी पूर्णिमा, रविदास जयन्तीमाघ मास की पूर्णिमा, जिस दिन तीर्थ-स्नान का विशेष महत्त्व माना गया है। इसी तिथि पर सन्त रविदास जी की जयन्ती भी मनाई जाती है।
6 मार्चमहाशिवरात्रिभगवान शिव की आराधना की महान रात्रि। भक्त उपवास, अभिषेक और रात्रि-जागरण करते हैं।
8 मार्चसोमवती अमावस्यासोमवार को पड़ने वाली अमावस्या। स्नान, दान और पितरों के स्मरण की परम्परा है।
21 मार्चहोलिका दहनबुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक। भक्त प्रह्लाद की कथा से जुड़ा पर्व।
22 मार्चहोलीरंगों का पर्व, जो आपसी प्रेम और मेल-मिलाप का सन्देश देता है।

अप्रैल–मई 2027

तिथिपर्वसरल अर्थ
7 अप्रैलवसन्त नवरात्र आरम्भ, नववर्षारम्भचैत्र शुक्ल प्रतिपदा। हिन्दू नववर्ष और चैत्र नवरात्र का पहला दिन।
12 अप्रैलसूर्यषष्ठी व्रत (चैती छठ)चैत्र मास में किया जाने वाला सूर्य उपासना का व्रत।
14 अप्रैलमेष संक्रान्तिसूर्य के मेष राशि में प्रवेश का दिन। कई क्षेत्रों में यह नववर्ष और फसल के पर्वों से जुड़ा है।
15 अप्रैलरामनवमीभगवान श्रीराम के जन्म का उत्सव।
18 अप्रैलमहावीर जयन्तीजैन परम्परा के चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर के जन्म का पर्व।
23 अप्रैलवीर कुँवरसिंह जयन्ती1857 के स्वतन्त्रता संग्राम के वीर योद्धा बाबू वीर कुँवरसिंह की स्मृति का दिन।
1 मईश्रमिक दिवसमेहनतकश लोगों के सम्मान का अन्तरराष्ट्रीय दिवस।
9 मईअक्षय तृतीया, परशुराम जयन्तीमान्यता है कि इस दिन किया गया शुभ कार्य कभी क्षीण नहीं होता। इसी दिन भगवान परशुराम का जन्मोत्सव भी है।
11 मईशंकराचार्य जयन्तीअद्वैत वेदान्त के प्रवर्तक आदि शंकराचार्य की जयन्ती।
18 मईनृसिंह चतुर्दशीभगवान विष्णु के नृसिंह अवतार का पर्व, जो भक्त प्रह्लाद की रक्षा की कथा से जुड़ा है।
20 मईवैशाख पूर्णिमा, कूर्म जयन्ती, बुद्ध जयन्तीवैशाख मास की पूर्णिमा। इसी तिथि पर भगवान विष्णु के कूर्म अवतार की जयन्ती और गौतम बुद्ध का जन्मोत्सव मनाया जाता है।

जून–जुलाई 2027

तिथिपर्वसरल अर्थ
4 जूनवट सावित्री व्रतसावित्री और सत्यवान की कथा से जुड़ा व्रत। इसमें वट वृक्ष की पूजा की जाती है।
7 जूनमहाराणा प्रताप जयन्तीमेवाड़ के वीर शासक महाराणा प्रताप की स्मृति का दिन।
10 जूनविन्ध्यवासिनी पूजामाँ विन्ध्यवासिनी की उपासना का दिन।
13 जूनगंगा दशहरामाँ गंगा के पृथ्वी पर अवतरण की स्मृति में मनाया जाता है। गंगा-स्नान और दान की परम्परा है।
18 जूनकबीर जयन्तीसन्त कबीर की स्मृति का दिन, जिनके दोहे आज भी जीवन के सरल सत्य सिखाते हैं।
4 जुलाईग्रीष्म नवरात्र आरम्भआषाढ़ मास में पड़ने वाले गुप्त नवरात्र की शुरुआत।
5 जुलाईजगन्नाथ रथयात्रापुरी में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी की भव्य रथयात्रा।
14 जुलाईहरिशयनी एकादशी, चातुर्मास्य व्रतारम्भमान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में जाते हैं। इसी से चार माह के चातुर्मास्य व्रत का आरम्भ होता है।
18 जुलाईगुरुपूर्णिमागुरु के प्रति आभार और श्रद्धा प्रकट करने का दिन। इसे महर्षि वेदव्यास की स्मृति से भी जोड़ा जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पर्व की तिथि हर साल बदल क्यों जाती है?

अधिकांश हिन्दू पर्व चन्द्रमा की तिथियों के अनुसार तय होते हैं, जबकि अंग्रेज़ी कैलेण्डर सूर्य के वर्ष पर चलता है। इसीलिए एक ही पर्व अंग्रेज़ी कैलेण्डर में हर साल अलग तारीख पर आता है। मकर संक्रान्ति जैसे सूर्य-आधारित पर्वों की तारीख लगभग स्थिर रहती है।

एक पर्व की तिथि दो पंचांगों में अलग क्यों दिखती है?

तिथि सूर्योदय के समय देखी जाती है, और कई बार वह दो दिन में फैली होती है। अलग-अलग पंचांग गणना की पद्धति और स्थान के अनुसार थोड़ा अलग दिन बता सकते हैं। ऐसे में अपने क्षेत्र का पंचांग या स्थानीय विद्वान की सलाह लेना सबसे अच्छा है।

सोमवती अमावस्या किसे कहते हैं?

जब अमावस्या तिथि सोमवार के दिन पड़ती है, तो उसे सोमवती अमावस्या कहते हैं। परम्परा में इस दिन स्नान, दान और पितरों के स्मरण को महत्त्व दिया गया है।

चातुर्मास में शुभ कार्य क्यों रुकते हैं?

परम्परा के अनुसार हरिशयनी एकादशी से देवोत्थान एकादशी तक भगवान विष्णु विश्राम में माने जाते हैं। इन चार महीनों में विवाह जैसे माँगलिक कार्य सामान्यतः नहीं किए जाते। यह मान्यता श्रद्धा और परम्परा पर आधारित है, इसका पालन कुल-परम्परा के अनुसार करें।

पाठ-आधार: [विश्वविद्यालय पंचाग, संवत् 2083, “विशिष्ट पर्व सूची”]

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