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भगवान शिव का दिव्य स्वरूप और शिव पंचाक्षर स्तोत्र का धार्मिक कवर चित्र
❖ स्तोत्र

शिव पंचाक्षर स्तोत्र | मूल पाठ, सरल हिंदी अर्थ और उच्चारण

शिव पंचाक्षर स्तोत्र का संपूर्ण संस्कृत पाठ, पाँच अक्षरों का महत्व, सरल हिंदी अर्थ और शुद्ध उच्चारण जानें। आदि शंकराचार्य रचित इस स्तोत्र से शिव-भक्ति करें।

श्रवण झा 25 अक्टूबर 2026⏱ 7 मिनट पढ़ें👁 16

परिचय

शिव पंचाक्षर स्तोत्र भगवान शिव के पाँच अक्षरों वाले मंत्र "नमः शिवाय" की स्तुति है। यह पाँच अक्षर हैं: न, म, शि, व, य। स्तोत्र के पहले पाँच श्लोकों में से हर श्लोक एक अक्षर पर है, और हर श्लोक की आखिरी पंक्ति में उसी अक्षर को नमस्कार किया गया है। छठा श्लोक पाठ का फल बताता है। परंपरा इसे आदि शंकराचार्य की रचना मानती है, और हमारे स्रोत की पुस्तक में भी यही नाम लिखा है। इस लेख में हर श्लोक मूल रूप में, फिर तोड़कर, और उसके बाद आसान हिंदी अर्थ के साथ दिया गया है।

पाँच अक्षर, पाँच श्लोक

श्लोकअक्षर
श्लोक 1न
श्लोक 2म
श्लोक 3शि
श्लोक 4व
श्लोक 5य
श्लोक 6पाठ का फल

पाँचों अक्षर जोड़ने पर बनता है: न-मः शि-वा-य।

तोड़कर पढ़ने का आसान तरीका

हर श्लोक पहले मूल रूप में दिया है, उसके नीचे वही श्लोक छोटे टुकड़ों में तोड़कर दिया है। हाइफ़न (-) का मतलब है हल्का रुकना। पहले टूटी हुई पंक्तियाँ धीरे-धीरे पढ़ें, फिर वही पंक्ति बिना रुके जोड़कर बोलें। तोड़ने में कोई अक्षर बदला या हटाया नहीं गया है।

उच्चारण के तीन आसान सूत्र

  1. नमः: आखिर में विसर्ग (ः) है, इसलिए "नमह" जैसी हल्की ध्वनि के साथ बोलें, झटके से नहीं।
  2. पठेच्छिवसन्निधौ: यहाँ "पठेत्" और "शिव" जुड़कर "पठेच्छिव" बने हैं। बोलते समय "पठेच्-छिव-सन्-निधौ" की तरह पढ़ें।
  3. 'न' काराय, 'म' काराय: इन्हें "नकाराय", "मकाराय" की तरह बोलें, यानी अक्षर के साथ "काराय" जोड़कर।

मूल पाठ और सरल अर्थ

श्लोक 1 (अक्षर 'न')

नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय
भस्माङ्गरागाय महेश्वराय ।
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय
तस्मै 'न' काराय नमः शिवाय ॥१॥

तोड़कर पढ़ें:
नागेन्द्र-हाराय त्रि-लोचनाय
भस्माङ्ग-रागाय महेश्वराय
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय
तस्मै 'न' काराय नमः शिवाय ॥१॥

सरल अर्थ: जिनके गले में नागराज का हार है, जिनके तीन नेत्र हैं, जिनके शरीर पर भस्म लगी है, जो महान ईश्वर हैं, सदा रहने वाले और शुद्ध हैं, और दिशाएँ ही जिनके वस्त्र हैं, उन 'न' अक्षर वाले शिव को नमस्कार।

श्लोक 2 (अक्षर 'म')

मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय
नन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय ।
मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय
तस्मै 'म' काराय नमः शिवाय ॥२॥

तोड़कर पढ़ें:
मन्दाकिनी-सलिल-चन्दन-चर्चिताय
नन्दीश्वर-प्रमथ-नाथ-महेश्वराय
मन्दार-पुष्प-बहु-पुष्प-सुपूजिताय
तस्मै 'म' काराय नमः शिवाय ॥२॥

सरल अर्थ: गंगाजल और चंदन से जिनकी पूजा होती है, जो नंदी और प्रमथ गणों के स्वामी महेश्वर हैं, और मंदार तथा और भी कई फूलों से जिनकी सुंदर पूजा की जाती है, उन 'म' अक्षर वाले शिव को नमस्कार।

श्लोक 3 (अक्षर 'शि')

शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्द-
सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय ।
श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय
तस्मै 'शि' काराय नमः शिवाय ॥३॥

तोड़कर पढ़ें:
शिवाय गौरी-वदनाब्ज-वृन्द-
सूर्याय दक्षाध्वर-नाशकाय
श्री-नीलकण्ठाय वृष-ध्वजाय
तस्मै 'शि' काराय नमः शिवाय ॥३॥

सरल अर्थ: जो कल्याण करने वाले हैं, जो पार्वतीजी के मुख रूपी कमलों को खिलाने वाले सूर्य जैसे हैं, जिन्होंने दक्ष के यज्ञ का नाश किया, जिनका कंठ नीला है और जिनकी ध्वजा पर बैल का चिह्न है, उन 'शि' अक्षर वाले शिव को नमस्कार।

श्लोक 4 (अक्षर 'व')

वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्य-
मुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय ।
चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनाय
तस्मै 'व' काराय नमः शिवाय ॥४॥

तोड़कर पढ़ें:
वसिष्ठ-कुम्भोद्भव-गौतमार्य-
मुनीन्द्र-देवार्चित-शेखराय
चन्द्रार्क-वैश्वानर-लोचनाय
तस्मै 'व' काराय नमः शिवाय ॥४॥

सरल अर्थ: वसिष्ठ, अगस्त्य और गौतम जैसे श्रेष्ठ मुनि तथा सभी देवता जिनके मस्तक की पूजा करते हैं, और चंद्रमा, सूर्य और अग्नि जिनके तीन नेत्र हैं, उन 'व' अक्षर वाले शिव को नमस्कार।

श्लोक 5 (अक्षर 'य')

यक्षस्वरूपाय जटाधराय
पिनाकहस्ताय सनातनाय ।
दिव्याय देवाय दिगम्बराय
तस्मै 'य' काराय नमः शिवाय ॥५॥

तोड़कर पढ़ें:
यक्ष-स्वरूपाय जटा-धराय
पिनाक-हस्ताय सनातनाय
दिव्याय देवाय दिगम्बराय
तस्मै 'य' काराय नमः शिवाय ॥५॥

सरल अर्थ: जिन्होंने यक्ष का रूप धारण किया, जो जटाएँ धारण करते हैं, जिनके हाथ में पिनाक धनुष है, जो सदा से हैं, दिव्य देव हैं और दिगंबर हैं, उन 'य' अक्षर वाले शिव को नमस्कार।

श्लोक 6 (पाठ का फल)

पञ्चाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेच्छिवसन्निधौ ।
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते ॥६॥

तोड़कर पढ़ें:
पञ्चाक्षर-मिदं पुण्यं यः पठेच्-छिव-सन्-निधौ
शिव-लोक-मवाप्नोति शिवेन सह मोदते ॥६॥

सरल अर्थ: जो व्यक्ति शिवजी के पास बैठकर इस पवित्र पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ करता है, वह शिवलोक पाता है और शिवजी के साथ आनंद में रहता है, ऐसा इस श्लोक में कहा गया है। यह श्रद्धा की बात है, कोई पक्का वादा नहीं।

इति श्रीमच्छङ्कराचार्यविरचितं शिवपञ्चाक्षरस्तोत्रं सम्पूर्णम् ।

कठिन शब्दों के आसान अर्थ

शब्दआसान अर्थ
नागेन्द्रनागों के राजा
त्रिलोचनतीन नेत्रों वाले
भस्मराख
अङ्गरागशरीर पर लगाया जाने वाला लेप
दिगम्बरदिशाएँ ही जिनके वस्त्र हैं
मन्दाकिनीगंगा
प्रमथशिवजी के गण
मन्दारएक दिव्य फूल
दक्षाध्वरदक्ष का यज्ञ
नीलकण्ठनीले कंठ वाले
वृषध्वजजिनकी ध्वजा पर बैल है
वैश्वानरअग्नि
पिनाकशिवजी का धनुष
सनातनसदा से रहने वाला
सन्निधिपास, समीपता

एक दिन में याद करने का तरीका

  • पहले पाँच अक्षर पक्के करें: न, म, शि, व, य। हर श्लोक की आखिरी पंक्ति इन्हीं पर बनी है।
  • आखिरी पंक्ति हर श्लोक में लगभग एक जैसी है: "तस्मै 'अक्षर' काराय नमः शिवाय"। यह एक बार याद हो जाए तो हर श्लोक की एक पंक्ति पक्की।
  • फिर रोज़ एक-दो श्लोक जोड़ते जाएँ। छह श्लोक आसानी से दो-तीन बैठकों में याद हो जाते हैं।

पाठ कैसे करें

  • कब: सुबह स्नान के बाद, या शाम को। सोमवार को पाठ करने की परंपरा है। तिथि और समय स्थान के अनुसार भिन्न हो सकता है।
  • कैसे: स्वच्छ स्थान पर शिवलिंग या शिवजी के चित्र के सामने बैठें। दीपक जलाएँ और धीरे-धीरे पढ़ें।
  • कितनी बार: एक बार पूरा पाठ। इससे ज़्यादा का नियम कुल-परंपरा या गुरु के अनुसार।
  • सावधानी: जल्दबाज़ी न करें। धीरे और साफ़ पढ़ना तेज़ पढ़ने से बेहतर है।

महत्व

पंचाक्षर मंत्र "नमः शिवाय" शिव-भक्ति का सबसे सीधा और जाना-पहचाना मंत्र माना जाता है। यह स्तोत्र उसी मंत्र के हर अक्षर को एक श्लोक में समझाता है। छोटा होने के कारण शुरुआत करने वालों के लिए यह बहुत आसान है। श्रद्धालु इसे मन की शांति और शिव-भक्ति के लिए पढ़ते हैं। इसे चमत्कार या गारंटी की तरह नहीं, भक्ति और एकाग्रता के साधन की तरह देखना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. शिव पंचाक्षर स्तोत्र में कितने श्लोक हैं?
इस पाठ में 6 श्लोक हैं।

2. पंचाक्षर कौन से हैं?
न, म, शि, व, य। इन्हें जोड़कर "नमः शिवाय" बनता है।

3. इसे किसने रचा?
परंपरा के अनुसार आदि शंकराचार्य ने। हमारे स्रोत की पुस्तक में भी अंतिम पंक्ति में यही नाम है।

4. पाठ में कितना समय लगता है?
धीरे-धीरे पढ़ने में लगभग 3 से 5 मिनट।

5. शुरुआत करने वाले क्या करें?
पहले पाँच अक्षर पक्के करें, फिर अर्थ समझें, तोड़ी हुई पंक्तियाँ पढ़ें और किसी जानकार या ऑडियो से उच्चारण मिला लें।

पाठ-आधार: श्रीशिवपञ्चाक्षरस्तोत्रम्, स्तोत्ररत्नावली (शिवस्तोत्राणि), पृ. 25 और 26।

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श्रवण झा

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