संस्कृत में गिनती सीखना मुश्किल क्यों लगता है
हिंदी में हम इक्यावन, बावन, तिरपन जैसे नाम बोलते हैं, और ये बिना सोचे याद हो जाते हैं। संस्कृत में पहली नज़र में ऐसा लगता है कि हर संख्या का नाम अलग ही है: एकत्रिंशत्, द्वात्रिंशत्, त्रयस्त्रिंशत्। पर सच यह है कि संस्कृत की गिनती में एक बहुत साफ़ ढाँचा है। जैसे ही वह ढाँचा समझ आता है, 1 से 100 तक की गिनती याद करना रटने का काम नहीं रहता, पहचानने का काम बन जाता है।
इस लेख में हम यही करेंगे। पहले 1 से 10, फिर हर दहाई का अलग पैटर्न, फिर वे नियम जो गिनती को जोड़ते हैं, और अंत में अभ्यास। साथ में गिनती का वह इस्तेमाल भी देखेंगे जो हम रोज़ पूजा-पाठ और श्लोकों में करते हैं, बिना ध्यान दिए।
सबसे पहले 1 से 10
1 से 4 तक की संख्याएँ बाकी से अलग हैं, क्योंकि ये संज्ञा के लिंग के अनुसार बदलती हैं। 5 से 10 सबको एक ही रूप में चलती हैं। इसलिए पहले 5 से 10 याद करना आसान है:
| अंक | संस्कृत |
|---|---|
| 5 | पञ्च |
| 6 | षट् |
| 7 | सप्त |
| 8 | अष्ट या अष्टौ |
| 9 | नव |
| 10 | दश |
ध्यान दें कि 8 के दो रूप चलते हैं: अष्ट और अष्टौ। दोनों सही माने जाते हैं।
1 से 4: लिंग के अनुसार तीन रूप
अब 1, 2, 3 और 4 की बारी। ये चारों संख्याएँ बदलती हैं, इसलिए इनके तीन रूप होते हैं: पुल्लिंग, नपुंसकलिंग और स्त्रीलिंग।
| अंक | पुल्लिंग | नपुंसकलिंग | स्त्रीलिंग |
|---|---|---|---|
| 1 | एकः | एकम् | एका |
| 2 | द्वौ | द्वे | द्वे |
| 3 | त्रयः | त्रीणि | तिस्रः |
| 4 | चत्वारः | चत्वारि | चतस्रः |
याद रखने का एक आसान तरीका यह है कि इन्हें वाक्य के साथ पढ़ें, जैसे:
- एकः बालकः, एका बालिका, एकं फलम्। (एक लड़का, एक लड़की, एक फल)
- द्वौ बालकौ, द्वे बालिके, द्वे फले। (दो लड़के, दो लड़कियाँ, दो फल)
- त्रयः बालकाः, तिस्रः बालिकाः, त्रीणि फलानि। (तीन लड़के, तीन लड़कियाँ, तीन फल)
- चत्वारः बालकाः, चतस्रः बालिकाः, चत्वारि फलानि। (चार लड़के, चार लड़कियाँ, चार फल)
अगर आपको इसमें अटकना पड़े, तो एक सूत्र काम करता है: तीन-चार में पुल्लिंग रूप "-अः" पर, नपुंसकलिंग "-इ/-णि" पर और स्त्रीलिंग "-स्रः" पर खत्म होता है। (त्रयः, त्रीणि, तिस्रः और चत्वारः, चत्वारि, चतस्रः।)
11 से 19: दश जुड़ता है
अब 10 के ऊपर की गिनती। यहाँ ढाँचा सरल है: इकाई वाली संख्या के आगे "दश" जोड़ दीजिए। कुछ जगह मेल (सन्धि) की वजह से रूप थोड़ा बदलता है, पर पहचान बनी रहती है।
| अंक | संस्कृत |
|---|---|
| 11 | एकादश |
| 12 | द्वादश |
| 13 | त्रयोदश |
| 14 | चतुर्दश |
| 15 | पञ्चदश |
| 16 | षोडश |
| 17 | सप्तदश |
| 18 | अष्टादश |
| 19 | नवदश (या एकोनविंशतिः) |
इस हिस्से में दो बातें पकड़िए। पहली, 16 यानी षोडश सबसे अलग है, यहाँ "षट्" का रूप पूरी तरह बदल जाता है, इसे सीधे रटना पड़ेगा। दूसरी, 19 के दो नाम हैं, जिनकी बात आगे "एकोन" वाले हिस्से में करेंगे।
20 से 29: विंशतिः का परिवार
| अंक | संस्कृत |
|---|---|
| 20 | विंशतिः |
| 21 | एकविंशतिः |
| 22 | द्वाविंशतिः |
| 23 | त्रयोविंशतिः |
| 24 | चतुर्विंशतिः |
| 25 | पञ्चविंशतिः |
| 26 | षड्विंशतिः |
| 27 | सप्तविंशतिः |
| 28 | अष्टाविंशतिः |
| 29 | नवविंशतिः (या एकोनत्रिंशत्) |
यहाँ पैटर्न है: इकाई वाली संख्या + विंशतिः। जैसे 24 में चतुर् + विंशतिः, यानी चतुर्विंशतिः। चौबीस तीर्थंकर या चौबीस अक्षर वाले गायत्री मंत्र के संदर्भ में यह शब्द कई जगह सुनने को मिलता है।
30 से 39: त्रिंशत् का परिवार
| अंक | संस्कृत |
|---|---|
| 30 | त्रिंशत् |
| 31 | एकत्रिंशत् |
| 32 | द्वात्रिंशत् |
| 33 | त्रयस्त्रिंशत् |
| 34 | चतुस्त्रिंशत् |
| 35 | पञ्चत्रिंशत् |
| 36 | षट्त्रिंशत् |
| 37 | सप्तत्रिंशत् |
| 38 | अष्टात्रिंशत् |
| 39 | नवत्रिंशत् (या एकोनचत्वारिंशत्) |
33 यानी त्रयस्त्रिंशत् का एक खास संबंध है: परंपरा में "तैंतीस करोड़ देवता" की बात होती है, जिसमें "कोटि" शब्द के दो अर्थ (प्रकार और करोड़) होते हैं। त्रयस्त्रिंशत् कोटि का सही अर्थ तैंतीस प्रकार के देवता माना जाता है। यह जानकारी पाठ्यक्रम में नहीं मिलती, पर इस संख्या को याद रखने में मदद करती है।
40 से 49: चत्वारिंशत् का परिवार
| अंक | संस्कृत |
|---|---|
| 40 | चत्वारिंशत् |
| 41 | एकचत्वारिंशत् |
| 42 | द्विचत्वारिंशत् या द्वाचत्वारिंशत् |
| 43 | त्रिचत्वारिंशत् या त्रयश्चत्वारिंशत् |
| 44 | चतुश्चत्वारिंशत् |
| 45 | पञ्चचत्वारिंशत् |
| 46 | षट्चत्वारिंशत् |
| 47 | सप्तचत्वारिंशत् |
| 48 | अष्टचत्वारिंशत् या अष्टाचत्वारिंशत् |
| 49 | नवचत्वारिंशत् या एकोनपञ्चाशत् |
50 से 59: पञ्चाशत् का परिवार
| अंक | संस्कृत |
|---|---|
| 50 | पञ्चाशत् |
| 51 | एकपञ्चाशत् |
| 52 | द्विपञ्चाशत् या द्वापञ्चाशत् |
| 53 | त्रिपञ्चाशत् या त्रयःपञ्चाशत् |
| 54 | चतुःपञ्चाशत् |
| 55 | पञ्चपञ्चाशत् |
| 56 | षट्पञ्चाशत् |
| 57 | सप्तपञ्चाशत् |
| 58 | अष्टपञ्चाशत् या अष्टापञ्चाशत् |
| 59 | नवपञ्चाशत् या एकोनषष्टिः |
60 से 69: षष्टिः का परिवार
| अंक | संस्कृत |
|---|---|
| 60 | षष्टिः |
| 61 | एकषष्टिः |
| 62 | द्विषष्टिः या द्वाषष्टिः |
| 63 | त्रिषष्टिः या त्रयःषष्टिः |
| 64 | चतुःषष्टिः |
| 65 | पञ्चषष्टिः |
| 66 | षट्षष्टिः |
| 67 | सप्तषष्टिः |
| 68 | अष्टषष्टिः या अष्टाषष्टिः |
| 69 | नवषष्टिः या एकोनसप्ततिः |
यह शब्द चौंसठ कलाओं की चर्चा में काम आता है: चतुःषष्टिः कलाः। यहाँ भी यह वही पैटर्न है, चतुः + षष्टिः।
70 से 79: सप्ततिः का परिवार
| अंक | संस्कृत |
|---|---|
| 70 | सप्ततिः |
| 71 | एकसप्ततिः |
| 72 | द्विसप्ततिः या द्वासप्ततिः |
| 73 | त्रिसप्ततिः या त्रयःसप्ततिः |
| 74 | चतुःसप्ततिः |
| 75 | पञ्चसप्ततिः |
| 76 | षट्सप्ततिः |
| 77 | सप्तसप्ततिः |
| 78 | अष्टसप्ततिः या अष्टासप्ततिः |
| 79 | नवसप्ततिः या एकोनाशीतिः |
80 से 89: अशीतिः का परिवार
यहाँ से संस्कृत की गिनती में एक छोटा मोड़ आता है। 80 से 89 में पुराना पैटर्न थोड़ा बदलता है, और जोड़ने पर रूप नरम हो जाते हैं।
| अंक | संस्कृत |
|---|---|
| 80 | अशीतिः |
| 81 | एकाशीतिः |
| 82 | द्व्यशीतिः |
| 83 | त्र्यशीतिः |
| 84 | चतुरशीतिः |
| 85 | पञ्चाशीतिः |
| 86 | षडशीतिः |
| 87 | सप्ताशीतिः |
| 88 | अष्टाशीतिः |
| 89 | नवाशीतिः या एकोननवतिः |
84 यानी चतुरशीतिः का नाम आपने ज़रूर सुना होगा: "चौरासी लाख योनियाँ"। परंपरा में जीवों की चौरासी लाख योनियों की बात होती है, जिसके लिए संस्कृत में "चतुरशीतिलक्ष" जैसे शब्द आते हैं।
90 से 100: नवतिः से शतम् तक
| अंक | संस्कृत |
|---|---|
| 90 | नवतिः |
| 91 | एकनवतिः |
| 92 | द्विनवतिः या द्वानवतिः |
| 93 | त्रिनवतिः या त्रयोनवतिः |
| 94 | चतुर्नवतिः |
| 95 | पञ्चनवतिः |
| 96 | षण्णवतिः |
| 97 | सप्तनवतिः |
| 98 | अष्टनवतिः या अष्टानवतिः |
| 99 | नवनवतिः या एकोनशतम् |
| 100 | शतम् |
एक बात और: कुछ संख्याओं के दो रूप दिए हैं, जैसे 42 में द्विचत्वारिंशत् और द्वाचत्वारिंशत्। दोनों सही हैं। अलग-अलग पुस्तकों में इनमें से किसी एक को ज़्यादा लिखा जाता है, इसलिए परीक्षा में अपनी पाठ्यपुस्तक का रूप लिखें।
पाँच नियम जो पूरी गिनती को जोड़ते हैं
नियम 1: दहाई का नाम बदलता नहीं, बस उसके आगे इकाई जुड़ती है
20, 30, 40... हर दहाई का एक पक्का नाम है: विंशतिः, त्रिंशत्, चत्वारिंशत्, पञ्चाशत्, षष्टिः, सप्ततिः, अशीतिः, नवतिः। इन आठ नामों को पक्का कर लें, बाकी गिनती इनके आगे इकाई लगाकर बनती है: पहले इकाई, फिर दहाई। जैसे 45 यानी पञ्च + चत्वारिंशत् = पञ्चचत्वारिंशत्।
नियम 2: "एकोन" का मतलब है "एक कम"
हर दहाई से ठीक पहले की संख्या (19, 29, 39 आदि) के लिए एक दूसरा रास्ता भी है: अगली दहाई के आगे "एकोन" लगा दीजिए। "एकोन" का अर्थ है "एक कम"। इसलिए:
- 19 = एकोनविंशतिः (बीस में एक कम)
- 29 = एकोनत्रिंशत् (तीस में एक कम)
- 39 = एकोनचत्वारिंशत् (चालीस में एक कम)
- 49 = एकोनपञ्चाशत्, 59 = एकोनषष्टिः, 69 = एकोनसप्ततिः, 79 = एकोनाशीतिः, 89 = एकोननवतिः, 99 = एकोनशतम्
पुस्तकों में यही दोनों नाम देखने को मिलते हैं, जैसे 49 के लिए नवचत्वारिंशत् और एकोनपञ्चाशत्। अब आप जानते हैं कि दोनों एक ही संख्या हैं।
नियम 3: दहाई के नाम हिंदी से जुड़े हैं
यह नियम गिनती को याद रखने का सबसे मज़ेदार तरीका है। हिंदी के दहाई वाले शब्द संस्कृत से ही निकले हैं:
| संस्कृत | हिंदी |
|---|---|
| विंशतिः | बीस |
| त्रिंशत् | तीस |
| चत्वारिंशत् | चालीस |
| पञ्चाशत् | पचास |
| षष्टिः | साठ |
| सप्ततिः | सत्तर |
| अशीतिः | अस्सी |
| नवतिः | नब्बे |
बोलकर देखिए: त्रिंशत् से तीस, पञ्चाशत् से पचास, सप्ततिः से सत्तर। जो शब्द हम रोज़ बोलते हैं, वही संस्कृत में मिल जाते हैं।
नियम 4: 5 से 19 लिंग नहीं बदलते
पञ्च से लेकर नवदश तक की संख्याएँ पुल्लिंग, स्त्रीलिंग और नपुंसकलिंग तीनों में एक ही रूप में चलती हैं। जैसे "पञ्च बालकाः", "पञ्च बालिकाः", "पञ्च फलानि"। केवल 1 से 4 को देखकर लिंग बदलना पड़ता है।
नियम 5: 20 से ऊपर की संख्याएँ संज्ञा के साथ ऐसे चलती हैं
विंशतिः, त्रिंशत् जैसे शब्द मूल रूप से संज्ञा हैं, पर शुरुआती कक्षाओं में इन्हें सीधे संज्ञा के आगे लगाकर बोला जाता है, जैसे "विंशतिः छात्राः", "त्रिंशत् छात्राः"। इस स्तर पर इतना याद रखना काफ़ी है।
पूजा-पाठ में गिनती कहाँ दिखती है
संस्कृत गिनती सिर्फ़ किताब में नहीं, हमारी रोज़ की भाषा में भी है। नीचे की सूची में आप देखेंगे कि कितने शब्द आपने पहले ही सुने हुए हैं:
- त्रि (3): त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश), त्रिनेत्र
- चतुः (4): चतुर्वेद, चतुर्भुज
- पञ्च (5): पञ्चामृत, पञ्चतत्त्व, पञ्चाक्षर मंत्र
- षट् (6): षडानन (छह मुख वाले कार्तिकेय)
- सप्त (7): सप्तर्षि, सप्ताह
- अष्ट (8): अष्टसिद्धि, अष्टलक्ष्मी
- नव (9): नवरात्र, नवग्रह
- दश (10): दशावतार, दशहरा, दश दिशाएँ
- एकादश (11): एकादशी
- द्वादश (12): द्वादश ज्योतिर्लिंग
- त्रयोदश (13): त्रयोदशी (प्रदोष व्रत इसी तिथि पर आता है)
- चतुर्दश (14): चतुर्दशी
- षोडश (16): षोडशोपचार पूजा, षोडश संस्कार
- अष्टादश (18): अष्टादश पुराण
- चतुःषष्टिः (64): चौंसठ कलाएँ
- शतम् (100): शतायु, शतक
अगली बार जब आप पंचांग या किसी पूजा की किताब में ये शब्द देखें, तो अब आप जानते हैं कि इनका मतलब सीधे संख्या से जुड़ा है।
वाक्यों में गिनती का प्रयोग
- मम गृहे पञ्च जनाः सन्ति। (मेरे घर में पाँच लोग हैं।)
- वृक्षे सप्त खगाः सन्ति। (पेड़ पर सात पक्षी हैं।)
- विद्यालये त्रिंशत् छात्राः सन्ति। (विद्यालय में तीस छात्र हैं।)
- मम पुस्तके शतं पत्राणि सन्ति। (मेरी किताब में सौ पन्ने हैं।)
- सप्ताहे सप्त दिनानि सन्ति। (सप्ताह में सात दिन होते हैं।)
बड़ी संख्याएँ
सौ के बाद संस्कृत में हज़ार, लाख और करोड़ से भी आगे के नाम हैं। नीचे आम तौर पर पाठ्यपुस्तकों में दी जाने वाली सूची है:
| हिंदी | संस्कृत |
|---|---|
| एक हज़ार | सहस्रम् |
| दस हज़ार | अयुतम् (दशसहस्रम्) |
| एक लाख | लक्षम् |
| दस लाख | नियुतम्, प्रयुतम् या दशलक्षम् |
| एक करोड़ | कोटिः |
| दस करोड़ | दशकोटिः |
| एक अरब | अर्बुदम् |
| दस अरब | दशार्बुदम् |
| एक खरब | खर्वम् |
| दस खरब | दशखर्वम् |
| एक नील | नीलम् |
| दस नील | दशनीलम् |
| एक पद्म | पद्मम् |
| दस पद्म | दशपद्मम् |
| एक शंख | शंखम् |
| दस शंख | दशशंखम् |
| महाशंख | महाशंखम् |
ध्यान दें: अलग-अलग ग्रंथों और पुस्तकों में इन बड़ी संख्याओं के मान थोड़े अलग भी मिलते हैं। यहाँ पाठ्यपुस्तकों में प्रचलित सूची दी गई है। परीक्षा के लिए अपनी पाठ्यपुस्तक का मान ही लिखें।
उच्चारण में ध्यान रखने वाले शब्द
| शब्द | कैसे बोलें |
|---|---|
| षट् | "ष" को मुँह के ऊपर की ओर घुमाकर बोलें, "षट्" |
| षोडश | षो-ड-श |
| चत्वारिंशत् | चत्-वा-रिं-शत् |
| त्रयस्त्रिंशत् | त्र-यस्-त्रिं-शत् |
| द्व्यशीतिः | द्व्य-शी-तिः |
| षण्णवतिः | षण्-ण-व-तिः |
सीखने के लिए पाँच दिन की योजना
- पहला दिन: 1 से 10, और लिंग के हिसाब से 1 से 4 के रूप।
- दूसरा दिन: 11 से 19। पहले एकादश से अष्टादश, फिर नवदश।
- तीसरा दिन: 20 से 49। पहले विंशतिः, त्रिंशत्, चत्वारिंशत् पक्के करें, फिर इकाई जोड़ें।
- चौथा दिन: 50 से 79।
- पाँचवाँ दिन: 80 से 100, और एकोन का नियम।
रोज़ सुबह बीस मिनट। अपने आसपास की चीज़ें गिनते हुए संस्कृत में बोलिए: कमरे में कितनी कुर्सियाँ हैं, हाथ में कितनी उँगलियाँ हैं, बैग में कितनी किताबें हैं। इससे गिनती किताब से निकलकर आपकी ज़ुबान पर आ जाएगी।
खुद को परखिए: 10 सवाल
- संस्कृत में 3 (स्त्रीलिंग) क्या होगा?
- एकादश कितने को कहते हैं?
- षोडश कितने को कहते हैं?
- 35 को संस्कृत में लिखिए।
- "एकोनत्रिंशत्" का अर्थ कितना है?
- सत्तर के लिए संस्कृत शब्द क्या है?
- चतुरशीतिः कितने को कहते हैं?
- एक लाख को संस्कृत में क्या कहते हैं?
- "पञ्च फलानि" का हिंदी अर्थ क्या है?
- नवतिः से एक कम की संख्या का एक नाम बताइए।
उत्तर: 1. तिस्रः। 2. 11। 3. 16। 4. पञ्चत्रिंशत्। 5. 29 (तीस में एक कम)। 6. सप्ततिः। 7. 84। 8. लक्षम्। 9. पाँच फल। 10. एकोननवतिः या नवाशीतिः (89)।
आम भूलें
- षष्टिः (60) और सप्ततिः (70) को आपस में मिला देना। याद रखें: षष्टिः में "ष" है, जैसे "षट्" (6) से, और सप्ततिः में "सप्त" (7) है।
- "एकोन" को "एक और" समझ लेना, जबकि इसका मतलब "एक कम" है।
- 1 से 4 में लिंग बदलना भूल जाना, खासकर स्त्रीलिंग तिस्रः और चतस्रः।
- षोडश (16) को षट्दश लिखना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
संस्कृत में 1 से 100 तक गिनती याद करने का सबसे आसान तरीका क्या है?
पहले दहाई के आठ नाम (विंशतिः से नवतिः) पक्के करें, फिर उनके आगे इकाई जोड़ना सीखें। इससे रटना बहुत कम हो जाता है।
एकोन का क्या मतलब होता है?
"एक कम"। जैसे एकोनविंशतिः यानी बीस में एक कम, यानी उन्नीस।
क्या 1 से 4 के रूप याद करना ज़रूरी है?
हाँ, क्योंकि ये संज्ञा के लिंग के अनुसार बदलती हैं और परीक्षा में इन्हीं से सवाल आते हैं।
कुछ संख्याओं के दो नाम क्यों हैं?
संधि के अलग-अलग नियमों और अलग-अलग परंपराओं की वजह से। दोनों सही माने जाते हैं।
कक्षा 6-8 में कितनी गिनती आती है?
आम तौर पर 1 से 100 तक। अपनी पाठ्यपुस्तक के हिसाब से देख लें।
संदर्भ: संस्कृत की प्रचलित व्याकरण-परंपरा और विद्यालयी पाठ्य-सामग्री।
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