गायत्री मंत्र: शब्दार्थ, भावार्थ और जप की सरल विधि
गायत्री मंत्र वैदिक परम्परा के सबसे प्रसिद्ध मंत्रों में से एक है। यह ऋग्वेद (3.62.10) में सविता देवता को समर्पित मंत्र के रूप में मिलता है। इसका केंद्रीय भाव है: बुद्धि का प्रकाश और सन्मार्ग की प्रेरणा।
मंत्र और सरल अर्थ
तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि।
धियो यो नः प्रचोदयात्॥
अर्थ
हम उस सविता देव के वरण करने योग्य तेज का ध्यान करते हैं, जो हमारी बुद्धियों को सही दिशा में प्रेरित करे।
