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✎ संस्कृत अध्ययन

स्वर संधि: पाँच भेद, नियम और उदाहरण

दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण और अयादि: स्वर संधि के पाँचों भेद सरल नियमों और उदाहरणों के साथ।

संपादकीय डेस्क 08 अक्टूबर 2026⏱ 3 मिनट पढ़ें👁 1
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दो वर्णों के पास-पास आने पर उनमें जो मेल या परिवर्तन होता है, उसे संधि कहते हैं। जब यह मेल स्वर और स्वर के बीच होता है, तो उसे स्वर संधि कहा जाता है। संस्कृत पढ़ने और शब्द-विच्छेद समझने के लिए यह पहली और सबसे उपयोगी सीढ़ी है।

1. दीर्घ संधि नियम: समान स्वर (ह्रस्व या दीर्घ) आपस में मिलें तो उनके स्थान पर वही दीर्घ स्वर हो जाता है। - अ/आ + अ/आ = आ: विद्या + आलय = विद्यालय; हिम + आलय = हिमालय - इ/ई + इ/ई = ई: कवि + इन्द्र = कवीन्द्र; मुनि + ईश = मुनीश - उ/ऊ + उ/ऊ = ऊ: भानु + उदय = भानूदय; लघु + ऊर्मि = लघूर्मि

2. गुण संधि नियम: अ या आ के बाद इ/ई, उ/ऊ या ऋ आए तो क्रमशः ए, ओ और अर् हो जाता है। - अ/आ + इ/ई = ए: नर + इन्द्र = नरेन्द्र; गण + ईश = गणेश - अ/आ + उ/ऊ = ओ: सूर्य + उदय = सूर्योदय; महा + उत्सव = महोत्सव - अ/आ + ऋ = अर्: महा + ऋषि = महर्षि; देव + ऋषि = देवर्षि

3. वृद्धि संधि नियम: अ या आ के बाद ए/ऐ आए तो ऐ, और ओ/औ आए तो औ हो जाता है। - अ/आ + ए/ऐ = ऐ: सदा + एव = सदैव; एक + एक = एकैक - अ/आ + ओ/औ = औ: वन + ओषधि = वनौषधि; महा + औषध = महौषध

4. यण संधि नियम: इ/ई, उ/ऊ या ऋ के बाद कोई असमान स्वर आए तो ये क्रमशः य्, व् और र् में बदल जाते हैं। - इ/ई + असमान स्वर = य्: अति + आचार = अत्याचार; इति + आदि = इत्यादि - उ/ऊ + असमान स्वर = व्: सु + आगत = स्वागत; अनु + एषण = अन्वेषण - ऋ + असमान स्वर = र्: पितृ + आज्ञा = पित्राज्ञा

5. अयादि संधि नियम: ए, ऐ, ओ, औ के बाद कोई स्वर आए तो इनके स्थान पर क्रमशः अय्, आय्, अव् और आव् हो जाता है। - ए + अ = अय्: ने + अन = नयन - ऐ + अ = आय्: गै + अक = गायक - ओ + अ = अव्: पो + अन = पवन - औ + इ = आव्: नौ + इक = नाविक

याद रखने की सरल तरकीब !! पहचान का क्रम: मेल के बाद लंबा समान स्वर बना (दीर्घ), ए/ओ/अर् बना (गुण), ऐ/औ बना (वृद्धि), य्/व्/र् आया (यण), या अय्/आय्/अव्/आव् आया (अयादि)।

अभ्यास नीचे दिए शब्दों का संधि-विच्छेद करके भेद पहचानें: 1. सूर्योदय 2. विद्यालय 3. सदैव 4. इत्यादि 5. पवन

उत्तर: 1. सूर्य + उदय (गुण); 2. विद्या + आलय (दीर्घ); 3. सदा + एव (वृद्धि); 4. इति + आदि (यण); 5. पो + अन (अयादि)।

और अध्ययन-सामग्री के लिए संस्कृत अध्ययन विभाग देखें।

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संपादकीय डेस्क

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